कल्लाजी राठौड़ “शेषनाग” के अवतार के रूप में पूज्य हैं

कल्लाजी के अधिकांश धाम राजस्थान के पश्चिम में वागड़ अंचल में स्थित हैं। महंत श्री भीम सिंह जी चौहान (काली कल्याण धाम, वर्दा के संस्थापक और सेवक) के सरल, उदार और कोमल स्वभाव के कारण श्री कल्लाजी राठौड़ की कीर्ति देश और विदेश में फैल रही है। यह पवित्र स्थान 23 वर्ष पहले एक लंबा घना वन था, किंतु महंत श्री भीम सिंह जी चौहान की भक्ति और समर्पण से यह स्थान अब श्री काली कल्याण धाम, वर्दा के नाम से जाना जाता है।
सन् 1925 में वर्दा के श्री परबत सिंह जी चौहान ने सबसे पहले यह गद्दी स्थापित की। इसके बाद प्रत्येक रविवार को मारन नदी के बाएँ तट पर एक छोटे मंदिर में महंत जी अपनी गद्दी पर विराजते थे। यहाँ श्री परबत सिंह जी चौहान श्री कल्लाजी राठौड़ के भाव को ग्रहण कर जरूरतमंद और गरीब लोगों की पीड़ा दूर करते थे। इस मंदिर की सबसे उल्लेखनीय बात यह है कि सर्पदोष से पीड़ित व्यक्ति को निश्चित रूप से लाभ होता है। रविवार के अतिरिक्त नवरात्रि में भी मेले लगते हैं, जिनमें विभिन्न क्षेत्रों के लोग भाग लेते हैं। सन् 1972 में महंत श्री परबत सिंह जी चौहान ने लगभग 100 वर्षों तक लोगों की सेवा करने के बाद देह त्यागी और अपने उत्तराधिकारी महंत श्री भीम सिंह जी चौहान को यह दायित्व सौंपा।
आज जो कोई रोग से पीड़ित है, पारिवारिक समस्याओं से व्यथित है, या बाहरी कठिनाइयों का सामना कर रहा है, सभी अपने जीवन में सुधार और शांति के लिए यहाँ पूजा करने आते हैं। और उन्हें अपनी समस्याओं के उत्तर और समाधान मिलते हैं।
लोगों ने उनकी पूजा से चमत्कार देखे। जैसे: जिन माताओं को संतान प्राप्ति में कठिनाई थी, या जो मानसिक रोग से पीड़ित थीं, कुछ परिवारों में आर्थिक संकट था, कुछ भावनात्मक रूप से व्यथित थे। सभी भक्तों को समाधान मिला और वे सुख से रहने लगे। यह चमत्कार अन्य देशों में भी होता है। जो भक्त भारतीय नहीं हैं और चीन, जर्मनी, अमेरिका आदि देशों से हैं, बावजी ने बिना पूछे ही उनकी सारी समस्याएँ बता दीं और उनका समाधान भी किया।